4
Advertisement
कभी फुर्सत मिले तो आना मेरी दुनिया में।
मेरी खातिर भी मुस्कुराना मेरी दुनिया में॥
तुम्हें हम याद कभी भूल कर नहीं आए।
फिर भी चर्चा है मगर तेरा मेरी दुनिया में॥
मेरी यादों में एक लम्हा अब भी ऐसा है।
गैरमुमकिन है भुला पाना मेरी दुनिया में॥
वो बीते लम्हे हमें अब भी याद आते हैं।
है सितारों का टिमटिमाना मेरी दुनिया में॥
बीते सावन में घटा झूम के जो आई थी ।
अब के सावन में है बरसाना मेरी दुनिया में॥
सवाल उठता है रह-रह वजूद पर मेरे।
जवाब अब भी पुराना है मेरी दुनिया में॥



यह रचना शोभा गुप्ता द्वारा लिखी गयी है। आप Eight Star Child Care Society की अध्यक्ष हैइनकी स्वतंत्र रूप से पत्र - पत्रिकाओं में रचनाएँ प्रकाशित होती रहती है

एक टिप्पणी भेजें

  1. आप की रचना 9 जुलाई के चर्चा मंच के लिए ली जा रही है, कृप्या नीचे दिए लिंक पर आ कर अपने सुझाव देकर हमें प्रोत्साहित करें.
    http://charchamanch.blogspot.com
    आभार
    अनामिका

    उत्तर देंहटाएं
  2. हमारी हार्दिक शुभकामना है: सदैव आलोकित होती रहें/करती रहें साहित्य की दुनिया मे। सुन्दर रचना।

    उत्तर देंहटाएं
  3. हम भी आ गये आपकी दुनिया मे ये सुन्दर सी गज़ल पढने । बधाई।

    उत्तर देंहटाएं

आपकी मूल्यवान टिप्पणियाँ हमें उत्साह और सबल प्रदान करती हैं, आपके विचारों और मार्गदर्शन का सदैव स्वागत है !
टिप्पणी के सामान्य नियम -
१. अपनी टिप्पणी में सभ्य भाषा का प्रयोग करें .
२. किसी की भावनाओं को आहत करने वाली टिप्पणी न करें .
३. अपनी वास्तविक राय प्रकट करें .

 
Top