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साथी, सब कुछ सहना होगा!

मानव पर जगती का शासन,
जगती पर संसृति का बंधन,
संसृति को भी और किसी के प्रतिबंधो में रहना होगा!
साथी, सब कुछ सहना होगा!

हम क्या हैं जगती के सर में!
जगती क्या, संसृति सागर में!
एक प्रबल धारा में हमको लघु तिनके-सा बहना होगा!
साथी, सब कुछ सहना होगा!

आ‌ओ, अपनी लघुता जानें,
अपनी निर्बलता पहचानें,
जैसे जग रहता आया है उसी तरह से रहना होगा!
साथी, सब कुछ सहना होगा!

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  1. GDHE ME RAHNE WALA PANI ,"AMRIT" KO KEYA KAH SAKTA HAI?
    HAM DEVANE HAI AAPKA CHAHO TO MERA ENTHA LELO,AGAR AAE KAM TUMARDI MERA JAN LELE...........MAI BAHUR KHUSNASIB HUN KI AAPKO PADH RAH HUN ....

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  2. साथी अब ना सहना होगा !
    विरुद्ध धारा के बहना होगा !

    उत्तर देंहटाएं
  3. इस टिप्पणी को एक ब्लॉग व्यवस्थापक द्वारा हटा दिया गया है.

    उत्तर देंहटाएं

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