3
Advertisement
महक उठे हर बगिया खुशबू से, वो वसंत कभी तो आएगा !
नव पल्लव फूटेंगे कोपल से
जग हरा भरा हो जायेगा !!
भाई के रक्त का प्यासाकोई भाई होगा ,
प्राण के लिए प्राणी कोई कसाई होगा ,
हो खवाबों का खून किसी के ,
वो स्वप्न कभी तो आएगा !

महक उठे हर बगिया खुशबु से ,
वो वसंत कभी तो आएगा . 
नव पल्लव फूटेंगे कोपल से जग हरा भरा हो जायेगा !!
न सड़कों पे कोई लाचार मिले  
सबको अपने हिस्से का अपना प्यार मिले 
जाति वर्ण का भेद मिटे , वो त्यौहार कभी तो आएगा 

महक उठे हर बगिया खुशबु से 
वो बसंत कभी तो आएगा ! 
नव पल्लव फूटेंगे कोपल से जग हरा भरा हो जायेगा !!
बहुत दुशासन आ गए गए धरा पर 
फिर बढ़ाने चीर किसी की , वो कृष्ण कभी तो आएगा !
महक उठे हर बगिया खुशबु से , वो बसंत कभी तो आएगा 
नव पल्लव फूटेंगे कोपल से 
जग हरा भरा हो जायेगा .!!





एक टिप्पणी भेजें

  1. Hi, Manish Very Nice Poem My Dear Friend Please i want to talk to you ....My cell No are 9411161101, 9897737799 and my email add. paneru5@gmail.com, please contect with me as soon as possible...thx

    उत्तर देंहटाएं
  2. मनीष जी शब्दों का अद्भुत तालमेल है. बस एक गुजारिश है की "शंघर्ष" को कृपया "संघर्ष" लिखियेगा. धन्यवाद

    उत्तर देंहटाएं

आपकी मूल्यवान टिप्पणियाँ हमें उत्साह और सबल प्रदान करती हैं, आपके विचारों और मार्गदर्शन का सदैव स्वागत है !
टिप्पणी के सामान्य नियम -
१. अपनी टिप्पणी में सभ्य भाषा का प्रयोग करें .
२. किसी की भावनाओं को आहत करने वाली टिप्पणी न करें .
३. अपनी वास्तविक राय प्रकट करें .

 
Top