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कर दिया न भारत बंद !
लगा दिया न १३ हजार करोड़ का चुना !!
सही कह रहे हो
तुम्हारे बाप का क्या गया,लेकिन
उन बापों का क्या होगा,जिन्होंने
अपने बच्चों के विश्वास को खो दिया
सिर्फ तुम्हारी करनी से।

कल रात
भूखे पेट
बच्चे को माँ ने कह कर सुलाया था कि कल
बापू जब कम से लौटेंगे
तुझे एक आज की और एक कल की मिलाकर
दो रोटियां दूँगी,देख
भैया ने,दीदी ने और बापू ने किसी ने भी कुछ
नहीं खाया,तू तो
मेरा लाडला बेटा है
चल पानी पी के सो जा।

कल सुगना की दवाई
नहीं आई,क्योंकि डॉक्टर की फीस देने के बाद
पैसे कहाँ बचे ? लेकिन
उसके बाप ने वादा किया था कि
"कल कम से कम दो दिन की दवाई लायेगा "
वह तो दरवाजे पर खड़ा हो कर
जुलूस वाली भीड़ को बस गाली दे रहा था।
सुगना ने कराहते हुए धीरे से बोला था
"मेरा बापू भी नेताओं की तरह झूठे वादे करता है
भले ही कोई मर जाये
उसे क्या।"

तुम्हारी कथनी और करनी में अंतर है
हम जानते हैं ,
तुम्हारे हाथ में जो तख्ती के पीछे चेहरा है
उसे पहचानते हैं ,लेकिन
गाँधी ,नेहरू के बाद बच्चे
सिर्फ अपने माँ - बापू को जानते हैं
उनकी कथनी-करनी को
सच मानते हैं
किसी के विश्वास के साथ खेलना
भले अपराध न हो,
बहुत बड़ा पाप है।

"भारत बंद "सफल रहा
लक्ष्य ..........?




यह कविता के .एन अमित द्वारा लिखी गयी है ,जो कि पेशे से वकील है । इनकी विभिन्न पत्र -पत्रिकाओं में रचनाएँ प्रकाशित होती रहती है ।

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