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मेरी सेज हाज़िर है
पर जूते और कमीज़ की तरह
तू अपना बदन भी उतार दे
उधर मूढ़े पर रख दे
कोई खास बात नहीं
बस अपने अपने देश का रिवाज़ है……

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  1. गुड्डोदादीजुलाई 22, 2010 4:55 pm

    अमृता जी को नतमस्तक
    कितना सुंदर आत्म मिलन
    १९६९ में साक्षात देवी के दर्शन किये थे

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