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विजयी के सदृश जियो रे - रामधारी सिंह दिनकर
विजयी के सदृश जियो रे - रामधारी सिंह दिनकर

वैराग्य छोड़ बाँहों की विभा संभालो चट्टानों की छाती से दूध निकालो है रुकी जहाँ भी धार शिलाएं तोड़ो पीयूष चन्द्रमाओं का पकड़ निचोड़ो चढ़ ...

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अब जो इक हसरत-ए-जवानी है - मीर तक़ी मीर
अब जो इक हसरत-ए-जवानी है - मीर तक़ी मीर

अब जो इक हसरत-ए-जवानी है उम्र-ए-रफ़्ता की ये निशानी है। ख़ाक थी मौजज़न जहाँ में, और हम को धोखा ये था के पानी है। गिरिया हर वक़्त का नह...

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हो गम न जहां -  डा. श्याम गुप्त
हो गम न जहां - डा. श्याम गुप्त

हो गम न जहां सुख हो या हो दुःख, ऐसा इक जग हो अपना। वो कल कभी तो आयेगा ही, चाहे आज हो केवल सपना || हम जियें जहां औरों के लिए, कोई न परा...

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ऊर्जा के नये स्रोत - मनोज सिंह
ऊर्जा के नये स्रोत - मनोज सिंह

ब्रह्मांड, आकाशगंगा, तारामंडल, सौरमंडल से लेकर हमारी पृथ्वी में चारों ओर ऊर्जा बिखरी हुई है। ब्लैक होल तो वैसे भी ऊर्जा का अंधा कुआं है जो अ...

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बीरबल का चौका - अकबर बीरबल के किस्से
बीरबल का चौका - अकबर बीरबल के किस्से

एक दिन अकबर बीरबल दोनों गाँव की सैर को निकले . दोनों अलग अलग बैगाडियों में सवार थे . रास्ते में भूख लगी तो बीरबल समोसा निकालकर खाने लगे . बा...

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वो बसंत कभी तो आएगा - मनीष कुमार पाठक "शंघर्ष" की कविता
वो बसंत कभी तो आएगा - मनीष कुमार पाठक "शंघर्ष" की कविता

महक उठे हर बगिया खुशबू से , वो वसंत कभी तो आएगा ! नव पल्लव फूटेंगे कोपल से जग हरा भरा हो जायेगा !! भाई के रक्त का ...

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ऊधो, मन माने की बात - सूरदास के पद
ऊधो, मन माने की बात - सूरदास के पद

राग सारंग ऊधो, मन माने की बात। दाख छुहारो छांड़ि अमृतफल, बिसकीरा बिस खात॥ जो चकोर कों देइ कपूर कोउ, तजि अंगार अघात। मधुप करत घर कोरि क...

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समाज का शिकार -  रविन्द्रनाथ टैगोर की कहानियाँ
समाज का शिकार - रविन्द्रनाथ टैगोर की कहानियाँ

रविन्द्रनाथ ठाकुर  मैं जिस युग का वर्णन कर रहा हूं उसका न आदि है न अंत! वह एक बादशाह का बेटा था और उसका महलों में लालन-पालन ह...

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ग़म के साथ अच्‍छी निभ गयी - बहादुर शाह ज़फ़र
ग़म के साथ अच्‍छी निभ गयी - बहादुर शाह ज़फ़र

ऐश से गुज़री कि ग़म के साथ अच्‍छी निभ गयी निभ गयी जो उस सनम के साथ अच्छी निभ गयी दोस्‍ती उस दुश्‍मने-जाँ ने निबाही तो सही  गो निभी ज़ुल्...

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सावन की बूंदों से  - दीपक पनेरू की कविता
सावन की बूंदों से - दीपक पनेरू की कविता

रिमझिम रिमझिम वर्षा से, जब तन मन भीगा जाता है, राग अलग सा आता है मन में, और गीत नया बन जाता है I   कोशिश करता है कोई शब्दों कि, कोई म...

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ऐसे उदास नज़रों से - अनामिका घटक की कविता
ऐसे उदास नज़रों से - अनामिका घटक की कविता

ऐसे उदास नज़रों से  न देखो दिल दहल जाएगा उदास क्यों हो बता दो गर दिल बहल जाएगा माथे पर शिकन आँखों में उदासी चेहरा बेनूर कर देगा परेशान क्य...

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आनन्दमठ (४) - बंकिमचन्द्र चट्टोपाध्याय
आनन्दमठ (४) - बंकिमचन्द्र चट्टोपाध्याय

सबेरा हो गया है। वह जनहीन कानन अब तक अंधकारमय और शब्दहीन था। अब आलोकमय प्रात: काल में आनंदमय कानन के आनंद-मठ सत्यानंद स्वामी मृगचर्म पर बै...

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wo basant kabhi to aayega
wo basant kabhi to aayega

महक उठे हर बगिया खुशबू से , वो बसंत कभी तो आएगा !   नव पल्लव फूटेंगे कोपल से जग हरा भरा हो जाएगा ! !   भाई के रक्त ...

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