1
Advertisement
तुम हो तो गाता है दिल
जो तुम नहीं तो गीत कहाँ
मैं भी यही सोंचता था
पर अनायास एक दिन अकेले
में एहसास हुआ की अंदर
भी गीत कोई गा रहा है
पर बाहरी दुनिया में खोया हुआ मेरा मन
जाने कौन सा डफली बजा रहा है
जो अंदर के सुगम संगीत से अनजान है
दर्दे डिस्को के तर्ज पर कदम थिरकता है
और चकाचौंध करने वाली रौशनी में खोया है
बोना चाहता तुलसी था शायद मैंने कैक्टस बोया है
--

एक टिप्पणी भेजें

आपकी मूल्यवान टिप्पणियाँ हमें उत्साह और सबल प्रदान करती हैं, आपके विचारों और मार्गदर्शन का सदैव स्वागत है !
टिप्पणी के सामान्य नियम -
१. अपनी टिप्पणी में सभ्य भाषा का प्रयोग करें .
२. किसी की भावनाओं को आहत करने वाली टिप्पणी न करें .
३. अपनी वास्तविक राय प्रकट करें .

 
Top