मैं पिक बन गाती डाल-डाल ,तू आता रहें हर बार - बार,तुझे देखती रहू मैं भर नजर,तू कहे तडपे मुझे हाल - हाल॥तू आने से सृष्टि भर जाती नव ज्वाररोमांचित होता कण - कण,उल्हसीत होता गीत-गुंजन,
तू आया करें बस मेहरनज़र॥आषाढ़ तू हैं, ग्रीष्म तू हैं,मनभावन का श्रीकृष्ण तू हैं,तेरे आने से बने सृष्टि नववधू,बस आए अब तू हे जलासिंधू॥---------------------------
यह कविता नेत्रा देशपाण्डेय द्वारा लिखी गयी है,जो कि एम.ए (हिंदी) की छात्रा है। आप हिंदी के साथ- साथ मराठी भाषा में भी कविता लिखती है।
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हे जलासिंधू - नेत्रा देशपाण्डेय की कविता
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1 टिप्पणियाँ:
tuzi kavita aali khup aanand zala
aashach kavita tuzy blok var yeot
hich subhecha
Regards
PRANAV KULKARNI
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