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बहुत सही ग़म-ए-गेती शराब कम क्या है
ग़ुलाम-ए-साक़ी-ए-कौसर हूँ मुझको ग़म क्या है

तुम्हारी तर्ज़-ओ-रविश जानते हैं हम क्या है
रक़ीब पर है अगर लुत्फ़ तो सितम क्या है

सुख़न में ख़ामा-ए-ग़ालिब की आतशअफ़शानी
यक़ीं है हमको भी लेकिन अब उस में दम क्या है

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