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काश कोई मुझे 'गिफ्ट' दे जाता,
मै भी उसे सजाता ,उसकी शोभा बढ़ाता।
नज़रों की गहराइयों में उतारता उसे,
इतराता जब भी देखता उसे।
मन में उसके प्रति एक याद बसाता।
यादों को बहाना बना कर ,उन्हें याद कर लेता
देना का वह लम्हा अपनी नज़रों में दोहराता।
कुछ पल खोजता,
उन अतितों में जिन्हें मै बिताया था।
चंद शब्दों के साथ,
कुछ चर्चों के साथ,
अन्तकरण के घरोंदों में,
जीवन के क्षण भर की यादों को,
तरोताजा कर लेता,
जब भी उसे देखता।



यह कविता दयाशंकर चौधरी जी द्वारा लिखी गयी है , जो कि भारतीय रेलवे( आंध्र-प्रदेश) में कार्यरत है।

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