सजनी कान्ह कें कहब बुझाइ - विद्यापति

सजनी कान्ह कें कहब बुझाइ।
रोपि पेम बिज अंकुर मूड़ल बांढब कओने उपाइ।।
तेल-बिन्दु दस पानि पसारिअ ऐरान तोर अनुराग।
सिकता जल जस छनहि सुखायल ऐसन तोर सोहाग।।
कुल-कामिली छलौं कुलटा भय गेलौं तनिकर बचन लोभाइ।
अपेनहि करें हमें मूंड मूडाओल कान्ह सेआ पेम बढ़ाइ।।
चोर रमनि जनि मने-मने रोइअ अम्बर बदन भपाइ।
दीपक लोभ सलभ जनि घायल से फल पाओल घाइ।।
भनइ विद्यापति ई कलयुग रिति चिन्ता करइ न कोई।
अपन करम-दोष आपहि भोगइ जो जनमान्तर होइ।।

0 टिप्पणियाँ:

एक टिप्पणी भेजें

आपकी मूल्यवान टिप्पणियाँ हमें उत्साह और सबल प्रदान करती हैं, आपके विचारों और मार्गदर्शन का सदैव स्वागत है !

Next previous home