0
Advertisement

दाल ही काला है

खून पसीने की कमाई

कौन कमाता है भाई

आज कल मोटा माल तो

दलाली से आता है

सर से पाँव तक भ्रष्टाचार

में डूबा ही नैतिकता के पाठ पढाता हैं

सपने आँखों में ही घुट घुट कर दम तोड़ देते है

जो ईमानदारी से काम लेते हैं

बेंच के ईमान बाजार में गिरवी रख लाज

तब निर्मित हुआ तथाकथित विकसित समाज

और जो बे ईमान हैं

उन्ही के हाँथ में देश की कमान है

डिग्री से ले के ताबूत तक हर ओर घोटाला है

दाल में काला नहीं यहाँ तो पूरा दाल ही काला है




एक टिप्पणी भेजें

आपकी मूल्यवान टिप्पणियाँ हमें उत्साह और सबल प्रदान करती हैं, आपके विचारों और मार्गदर्शन का सदैव स्वागत है !
टिप्पणी के सामान्य नियम -
१. अपनी टिप्पणी में सभ्य भाषा का प्रयोग करें .
२. किसी की भावनाओं को आहत करने वाली टिप्पणी न करें .
३. अपनी वास्तविक राय प्रकट करें .

 
Top