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एक मात्र सवाल और फिर मैं मौन

पहचान कौन?

क्या नहीं पहचाना मैं तो हमेशा तुम्हारे साथ

तुम्हारे ही अंदर रहता हूँ

और कहता हूँ की कभी तो अंतर्मुखी हो

मुझसे भी करो मुलाकात

न सही लंबी चर्चा कुछ तो करो बात

कभी तो हो रूबरू अपने यथार्थ से

अंतर्मन का कृष्ण निवेदन ज्यूँ करता पार्थ से

उठाओ मनोबल करदो शंखनाद

और अन्तर्निहित भय का पूर्णतः करो विध्वंश

स्मरण रहे हो तुम इश के अंश...............


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  1. ati sundar abhivyakti.....kal ke charcha manch par aapkipost hogi.

    उत्तर देंहटाएं
  2. और अन्तर्निहित भय का पूर्णतः करो विध्वंश

    स्मरण रहे हो तुम इश के अंश...............

    कदम इस कोशिस में उठते तो होंगे लड़खड़ाते कितने ....!!

    उत्तर देंहटाएं
  3. सटीक.....बहुत सुन्दर अभिव्यक्ति..

    उत्तर देंहटाएं

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