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जले तो जलाओ गोरी,पीत का अलाव गोरी
अभी न बुझाओ गोरी, अभी से बुझाओ ना ।
पीत में बिजोग भी है, कामना का सोग भी है
पीत बुरा रोग भी है, लगे तो लगाओ ना ।।
गेसुओं की नागिनों से, बैरिनों अभागिनों से
जोगिनों बिरागिनों से, खेलती ही जाओ ना ।
आशिकों का हाल पूछो, करो तो ख़याल- पूछो
एक-दो सवाल पूछो, बात जो बढ़ाओ ना ।।

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  1. गुड्डोदादीमई 16, 2010 7:59 am

    इब्ने इंशा जी
    चिरंजीव भवः
    पीत में बिजोग भी है कामना का सोग भी है
    पीत बुरा रोग भी है ले तो लगाओ ना
    आपकी कविता बहुत ही भावपूर्ण है
    जी कर लिखी है
    लिखना तो चाहती थी पर ७० की आयु में क्या लिखूं

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