एक नया अनुभव - हरिवंशराय बच्चन की कविता


मैनें चिड़िया से कहा, मैं तुम पर एक
कविता लिखना चाहता हूँ।
चिड़िया नें मुझ से पूछा, 'तुम्हारे शब्दों में
मेरे परों की रंगीनी है?'
मैंने कहा, 'नहीं'।
'तुम्हारे शब्दों में मेरे कंठ का संगीत है?'
'नहीं।'
'तुम्हारे शब्दों में मेरे डैने की उड़ान है?'
'नहीं।'
'जान है?'
'नहीं।'
'तब तुम मुझ पर कविता क्या लिखोगे?'
मैनें कहा, 'पर तुमसे मुझे प्यार है'
चिड़िया बोली, 'प्यार का शब्दों से क्या सरोकार है?'
एक अनुभव हुआ नया।
मैं मौन हो गया!

4 टिप्पणियाँ

badi gahri baat kah di......shukriya padhwane ka.

बेनामी
1 जून 2010 9:35 am

haanji harivanshrai bachchanji ko hamara saprem namaskar.

बेनामी
30 जून 2010 11:50 am

gahan bat hai.thanks

bhut unchi bat kahi gai hai thanks jo apne hme ise padne ka mauka diya

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