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सआदत हसन मंटो
पहली घटना नाके के होटल के पास हुयी फौरन ही वहां एक सिपाही का पहरा लगा दिया गया। दूसरी घटना दूसरे ही रोज शाम को स्टोर के सामने हुयी, सिपाही को पहली जगह से हटाकर दूसरी घटना की जगह भेज दिया गया। तीसरा केस रात बारह बजे लांडरी के पास हुआ, जब इंस्पेकटर ने सिपाही को इस नयी जगह पर पहरा देने का हुक्म दिया तो उसने कुछ देर सोचने के बाद कहा, ‘‘मुझे वहां खड़ा कीजिये जहां नयी घटना होने वाली है!’’

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