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सआदत हसन मंटो
“मैंने उसकी शहरग पर छुरी रखी, हौले-हौले फेरी और उसको हलाल कर दिया.”
“यह तुमने क्या किया?”
“क्यों?”
“इसको हलाल क्यों किया?”
"मज़ा आता है इस तरह."
“मज़ा आता है के बच्चे.....तुझे झटका करना चाहिए था....इस तरह. ”
और हलाल करनेवाले की गर्दन का झटका हो गया.

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  1. क्या नहीं है आपके साहित्य सागर में ! सारे रत्न हैं !
    bahut uttam !

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  2. accha aur pryapt sahitya vo bhi ek jagah ye to sone me suhaga vali bat hai mere liye vakayi bahut sukhad anubhav huua yaha apne vakt ka sadupyog kar ke

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  3. मंटो की एक कहानी है, जिसका नाम शायद ’नंगी आवाजें’ हैं। वो भी कभी डालिये ब्लॉग पर।

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  4. हिन्दी साहित्य पर इतना सब कुछ एक स्थान पर शायद और कहीं नहीं मिल पाएगा |

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  5. हिन्दी साहित्य पर इतना सब कुछ एक स्थान पर शायद और कहीं नहीं मिल पाएगा |

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