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तराना-ए-हिन्द  -  इक़बाल
तराना-ए-हिन्द - इक़बाल

सारे जहाँ से अच्छा हिन्दोस्ताँ हमारा हम बुलबुलें हैं उसकी ये गुलसिताँ हमारा ग़ुरबत में हों अगर हम रहता है दिल वतन में समझो वहीं हमें भी दिल...

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चुटकुले जोक्स
चुटकुले जोक्स

सडक पर एक मजमेबाज़: "यह दवा ज़रुर लिजिये। आपकी जवानी लौट आयेगी। मुझे देखिए, इस दवा के कारण ही तीन सौ साल की उमर तक पहुँच गया हूँ।"...

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शरद जोशी की व्यंग कथा
शरद जोशी की व्यंग कथा

सबसे पहले वे ’भारत टाकीज’ गए। हाउस फुल हो चुका था, ब्लैक में भी टिकट नहीं मिल रही है। वे स्कूटर पर बैठे और ’रंग महल’ की तरफ आए लेकिन वहाँ ...

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हरिशंकर परसाई का व्यंग - शर्म की बात पर ताली पीटना
हरिशंकर परसाई का व्यंग - शर्म की बात पर ताली पीटना

मैं आजकल बड़ी मुसीबत में हूं। मुझे भाषण के लिए अक्सर बुलाया जाता है। विषय यही होते हैं- देश का भविष्य, छात्र समस्या, युवा-असंतोष, भारतीय स...

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हरिशंकर परसाई का व्यंग - वह जो आदमी है न
हरिशंकर परसाई का व्यंग - वह जो आदमी है न

निंदा में विटामिन और प्रोटीन होते हैं। निंदा खून साफ करती है, पाचन-क्रिया ठीक करती है, बल और स्फूर्ति देती है। निंदा से मांसपेशियां पुष्ट ...

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अमृतलाल नागर की कहानी - प्रायश्चित
अमृतलाल नागर की कहानी - प्रायश्चित

जीवन वाटिका का वसंत, विचारों का अंधड़, भूलों का पर्वत, और ठोकरों का समूह है यौवन। इसी अवस्था में मनुष्य त्यागी, सदाचारी, देश भक्त एवं समाज...

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काम कोई मुझे बाकी नहीं -  अकबर इलाहाबादी
काम कोई मुझे बाकी नहीं - अकबर इलाहाबादी

काम कोई मुझे बाकी नहीं मरने के सिवा कुछ भी करना नहीं अब कुछ भी न करने के सिवा हसरतों का भी मेरी तुम कभी करते हो ख़याल तुमको कुछ और भी आता ह...

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दोनों जहाँ देके वो समझे ये ख़ुश रहा - मिर्ज़ा गालिब
दोनों जहाँ देके वो समझे ये ख़ुश रहा - मिर्ज़ा गालिब

दोनों जहाँ देके वो समझे ये ख़ुश रहा यां आ पड़ी ये शर्म की तकरार क्या करें थक थक के हर मक़ाम पे दो चार रह गये तेरा पता न पायें तो नाचार क्...

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इब्ने इंशा की कहानी - भारत
इब्ने इंशा की कहानी - भारत

इब्ने इंशा यह भारत है। गांधी जी यहीं पैदा हुए थे। यहां उनकी बड़ी इज़्ज़त होती थी। उन्हें महात्मा कहते थे। चुनांचे मारकर उन्हें यहीं द...

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सत्य तो बहुत मिले  - अज्ञेय
सत्य तो बहुत मिले - अज्ञेय

खोज में जब निकल ही आया सत्य तो बहुत मिले । कुछ नये कुछ पुराने मिले कुछ अपने कुछ बिराने मिले कुछ दिखावे कुछ...

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झाँकी - प्रेमचंद की कहानियाँ
झाँकी - प्रेमचंद की कहानियाँ

कई दिन से घर में कलह मचा हुआ था। मॉँ अलग मुँह फुलाए बैठी थीं, स्त्री अलग। घर की वायु में जैसे विष भरा हुआ था। रात को भोजन नहीं बना, दिन को ...

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निर्मला (१९) - प्रेमचंद का उपन्यास
निर्मला (१९) - प्रेमचंद का उपन्यास

अबकी सुधा के साथ निर्मला को भी आना पड़ा। वह तो मैके में कुछ दिन और रहना चाहती थी, लेकिन शोकातुर सुधा अकेले कैसे रही! उसको आखिर आना ही पड़ा।...

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चुटकुले जोक्स
चुटकुले जोक्स

रेस्तरां मे काँफी पीते हुए कमलेश ने धीमे से प्रेम को बताया , देखो, उधर कोने वाली कुर्सी पर बैठा वह आदमी बडी देर से मुझे घूर रहा है। प्रेम: ...

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नयी चेतना  -  महेंद्रभटनागर
नयी चेतना - महेंद्रभटनागर

महेंद्रभटनागर-विरचित ‘नयी चेतना’ हिन्दी प्रगतिशील कविता की महत्त्वपूर्ण उपलब्धि है। इसमें कवि की सन्‌ १९५० से १९५३ के मध्य लिखी ४५ कविताएँ स...

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अमृत राय की कहानी - व्यथा का सरगम
अमृत राय की कहानी - व्यथा का सरगम

है। गहरी। काली। नीरव। नि:स्तब्ध। केवल दूर पर कुत्तों के भूँकने की आवांज और कुछ गीदड़ों की। मनुष्य की आवांज तो गाने की एकाध कड़ी के रू...

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तेरे ग़म को जाँ की तलाश थी - फ़ैज़ अहमद फ़ैज़
तेरे ग़म को जाँ की तलाश थी - फ़ैज़ अहमद फ़ैज़

तेरे ग़म को जाँ की तलाश थी तेरे जाँ-निसार चले गये तेरी राह में करते थे सर तलब सर-ए-राह-गुज़ार चले गये तेरी कज़ -अदाई से हार क...

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सुर्ख़ हथेलियाँ  - सर्वेश्वरदयाल सक्सेना
सुर्ख़ हथेलियाँ - सर्वेश्वरदयाल सक्सेना

पहली बार मैंने देखा भौंरे को कमल में बदलते हुए, फिर कमल को बदलते नीले जल में, फिर नीले जल को ...

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सिर्फ एक आवाज - प्रेमचंद की कहानियाँ
सिर्फ एक आवाज - प्रेमचंद की कहानियाँ

सुबह का वक्त था। ठाकुर दर्शनसिंह के घर में एक हंगामा बरपा था। आज रात को चन्द्रग्रहण होने वाला था। ठाकुर साहब अपनी बूढ़ी ठकुराइन के साथ गंग...

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शरण में जन, जननि -  सूर्यकांत त्रिपाठी "निराला"
शरण में जन, जननि - सूर्यकांत त्रिपाठी "निराला"

अनगिनित आ गये शरण में जन, जननि- सुरभि-सुमनावली खुली, मधुऋतु अवनि! स्नेह से पंक - उर हुए पंकज मधुर, ऊर्ध्व - दृग गगन में देखते मुक्ति-मणि! बी...

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शुभकामनाएँ -  सर्वेश्वरदयाल सक्सेना
शुभकामनाएँ - सर्वेश्वरदयाल सक्सेना

नये साल की शुभकामनाएँ! खेतों की भेड़ों पर धूल-भरे पाँव को, कुहरे में लिपटे उस छोटे-से गाँव को, नए साल की शुभकामनाएँ! जाते के गीतों को, बैलो...

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इंतज़ार की रात -  इब्ने इंशा
इंतज़ार की रात - इब्ने इंशा

उमड़ते आते हैं शाम के साये दम-ब-दम बढ़ रही है तारीकी एक दुनिया उदास है लेकिन कुछ से कुछ सोचकर दिले-वहशी मुस्कराने लगा है- जाने क्यों ? वो चल...

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