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श्रीलाल शुक्ल जी, हिंदी साहित्य के प्रमुख साहित्यकार हैरागदरबारी उनका प्रसिद्ध उपन्यास हैइसका प्रकाशन सन १९६८ में हुआइसी उपन्यास पर उन्हें सन १९७० में साहित्य अकादमी पुरस्कार भी प्राप्त हुआइस उपन्यास की कथावस्तु तो शिवपालगंज तक ही सिमित है, लेकिन इसकी अंतर्वस्तु देशव्यापी हैइस उपन्यास में उन्होंने स्वाधीनता के उपरान्त भारतीय समाज में व्याप्त भ्रष्टाचार , अराजकता ,भाई-भतीजावाद ,लूट-खसोट ,अवसरवादिता तथा प्रजातंत्र के नाम पर चल रही बेईमानी को उन्होंने बड़ी ही कुशलता के साथ चित्रित किया है

यहां पर राग- दरबारी उपन्यास को ई-बुक के रूप में दिया जा रहा है। आशा है कि आप सभी को यह पसंद आएगा ।
आप इस पुस्तक को यहाँ से डाउनलोड करें ,खुद पढ़ें और अपने मित्रों को भी पढ़ने के लिए वितरित करें ।
मुझे आपके सुझावों की प्रतीक्षा है।

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  1. apka bahut bahut dhanyavad ki ap ne es amulya pustak ko free me uplabha karai. thanx a lot.

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  2. Bahut bahut dhanyawaad.. Bahut mushkil se ye sab milta he.
    Kya in kitabo ka e-book version AZW/.MOBI format me jo ki Kindle ya e-book reader pe pada ja sake, mil sakta he..
    scanned pdf ko kindle format me convert karne pe bahut kuchh loss ho jata he...
    Agar ye in formats me available to ye kaee aur logo ke haatho tak pahuch sakti he...

    Dhanyawaad..

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  3. Bahut bahut dhanyawaad.. Bahut mushkil se ye sab milta he.
    Kya in kitabo ka e-book version AZW/.MOBI format me jo ki Kindle ya e-book reader pe pada ja sake, mil sakta he..
    scanned pdf ko kindle format me convert karne pe bahut kuchh loss ho jata he...

    Dhanyawaad..

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  4. राग दरबारी जैसी कालजयी रचना को यहाँ इतनी सरलता से जनमानस तक पहुँचाने के लिए आपका बहुत बहुत धन्यवाद !

    आशा है कि हमारी हिंदी भाषा में ऐसे मूल्यवान कृतित्व आगे भी यहाँ मिलते रहेंगे.

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