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आँधी के झूले पर झूलो
आग बबूला बन कर फूलो
कुरबानी करने को झूमो
लाल सबेरे का मूँह चूमो
ऐ इन्सानों ओस न चाटो
अपने हाथों पर्वत काटो

पथ की नदियाँ खींच निकालो
जीवन पीकर प्यास बुझालो
रोटी तुमको राम न देगा
वेद तुम्हारा काम न देगा
जो रोटी का युद्ध करेगा
वह रोटी को आप वरेगा ।

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  1. karm par astha rakhane ko prerit karatee rachanaacchee lagee.bhagvan bharose jindgee nahee kat sakte ....

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  2. बहुत इच्छा थी मुक्तिबोध जी को पढने की सुन्दर प्रेरक कविता के लिये धन्यवाद्

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