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एक छोटा-सा लड़का था मैं जिन दिनों
एक मेले में पंहुचा हुमकता हुआ
जी मचलता था एक-एक शै पर मगर
जेब खाली थी कुछ मोल ले न सका
लौट आया लिए हसरतें सैकड़ों
एक छोटा-सा लड़का था मै जिन दिनों

खै़र महरूमियों के वो दिन तो गए
आज मेला लगा है इसी शान से
आज चाहूं तो इक-इक दुकां मोल लूं
आज चाहूं तो सारा जहां मोल लूं
नारसाई का जी में धड़का कहां ?
पर वो छोट-सा अल्हड़-सा लड़का कहां ?

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  1. बहुत खूब, वक़्त क्या होता है ये आपने बताया ? पर एक बात बहुत ही अच्छी लगी की छोटे लड़के ने जब चाहा तब उसको न मिला पर जब मिला तो वोह छोटा लड़का न था बचपन की मासूमियत और फिर बचपन से जवानी तक का सफर ने सिखाया की जो बचपन में न पा सका पर अब जवानी में प्राप्त कर लो पर बचपन की इच्छा और जवानी की इच्छा में बहुत ही बड़ा फर्क था और बचपन की इच्छा तो वही की वही रही गयी बहुत ही खूब ...

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