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प्रिय मित्रों, इसके पहले रविन्द्रनाथ ठाकुर की विश्व प्रसिद्ध रचना 'गीतांजलि' को ई-बुक के रूप में दिया गया था। अब आप इसे ऑनलाइन पढ़ने के साथ - साथ सेव  भी कर सकते है। आशा है कि यह हिंदीकुंज के पाठकों को पसंद आएगी । मुझे इस सम्बन्ध में आपके सुझाओं की प्रतीक्षा है।


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  1. मित्रो,
    यहॉं सिर्फ 15 गीतों के अनुवाद दिए गए हैं। ये अनुवाद अच्‍छे बन पड़े हैं। वैसे हिन्‍दी में अब तक गीतांजलि के 38 अनुवाद प्रकाशित हो चुके हैं, उनके बारे में विस्‍तार से जानने के लिए आप निम्‍नांकित लिंक पर प्रकाशित आलेख पढ़ सकते हैं :
    http://www.scribd.com/doc/24640777/
    गीतांजलि का एक नवीनतम अनुवाद मैं भी कर रहा हूँ, अपने ब्‍लॉग पर रोज एक गीत का अनुवाद पोस्‍ट कर रहा हूँ। यह नवीनतम अनुवाद पढ़ने के लिए आप निम्‍नांकित लिंक देख सकते हैं:
    http://hindigitanjali.blogspot.com/

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  2. gitanjali padne se pehle itni khushi ho rahi hai 'lagta hai padne ke baad rab ko pa lenge.aameen

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  3. KAB SE GEETANJLI PADHNE KA DIL THA BUT KABHI MAUKA HI NI MIL PA RAHA THA ..AAJ JAB ISE PADHA TO LAGA KYUN ITNA SAMAY BARBAAD KIYA BAHUT PEHLE PADH LENA THA..
    SARVOTTAM RACHNA GURUDEV KI.

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