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गम रहा जब तक कि दम में दम रहा

दिल के जाने का निहायत गम रहा


हुस्न था तेरा बहुत आलम फरेब

खत के आने पर भी इक आलम रहा


मेरे रोने की हकीकत जिस में थी

एक मुद्दत तक वो कागज नम रहा


जामा-ऐ-एहराम-ऐ-ज़ाहिद पर न जा

था हरम में लेकिन ना-महरम रहा


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  1. मेरे रोने की हकीकत जिस में थी

    एक मुद्दत तक वो कागज नम रहा
    Kya gazab alfaz hain!Aisee mahan rachnaon se ru-b-ru karaneka shukriya!

    उत्तर देंहटाएं
  2. jane kis baat ki saza mujhko saja dete h, meri hasti hui aankho ko rula dte h, ek muddat se v khabar nhi tery, kya is tarah bhi apne dost ko bhula dete h.............(ahmad ajij)

    उत्तर देंहटाएं
  3. jane kis baat ki saza mujhko saja dete h, meri hasti hui aankho ko rula dte h, ek muddat se v khabar nhi tery, kya is tarah bhi apne dost ko bhula dete h.............(ahmad ajij)

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