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जो तुम आ जाते एक बार ।

कितनी करूणा कितने संदेश
पथ में बिछ जाते बन पराग
गाता प्राणों का तार तार
अनुराग भरा उन्माद राग
आँसू लेते वे पथ पखार
जो तुम आ जाते एक बार ।

हंस उठते पल में आद्र नयन
धुल जाता होठों से विषाद
छा जाता जीवन में बसंत
लुट जाता चिर संचित विराग
आँखें देतीं सर्वस्व वार
जो तुम आ जाते एक बार ।

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  1. बेनामीमई 14, 2011 12:27 pm

    Mai Sanjeev Kumar Apko Thanks kahta hu, kyo ki aap ne mujhse tippdi
    maga, iske liye per mai kanjush wo bhi aap ko dane ma so bar soch raha
    hu.fir bhi mera apse anurodh ha ki aap jis rah per chhal rahe ho us per chalte raho ,sadhanyvad.

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  2. बेनामीमई 26, 2012 12:46 pm

    This poem is awesome but i didn't understood the meaning.

    उत्तर देंहटाएं
  3. this poem is very nice and related with realty. i live it mahadeviji was a doordarshi poet.

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