घूस माहात्म्य - काका हाथरसी

कभी घूस खाई नहीं, किया न भ्रष्टाचार
ऐसे भोंदू जीव को बार-बार धिक्कार
बार-बार धिक्कार, व्यर्थ है वह व्यापारी
माल तोलते समय न जिसने डंडी मारी
कहँ 'काका', क्या नाम पायेगा ऐसा बंदा
जिसने किसी संस्था का, न पचाया चंदा

4 टिप्पणियाँ:

kshama ने कहा…

Wo wyaktika jeevan bhi kya jeevan,jisne kaka ko na padha ho!

सुशीला पुरी ने कहा…

kaka ka jawab nhi ...

निर्मला कपिला ने कहा…

वाह काका जी को पढे बहुत दिन हो गये थे धन्यवाद्

RC ने कहा…

kaka ko padh kar hansi na aaye , mood badal na jaye aisa ho nahi sakta .
kaka mere priya hain. adwitiye hain

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