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पंथ पर चलना तुझे तो मुस्कुराकर चल मुसाफिर!
वह मुसाफिर क्या जिसे कुछ शूल ही पथ के थका दें?
हौसला वह क्या जिसे कुछ मुश्किलें पीछे हटा दें?
वह प्रगति भी क्या जिसे कुछ रंगिनी कलियाँ तितलियाँ,

मुस्कुराकर गुनगुनाकर ध्येय-पथ, मंजिल भुला दें?
जिन्दगी की राह पर केवल वही पंथी सफल है,
आँधियों में, बिजलियों में जो रहे अविचल मुसाफिर!
पंथ पर चलना तुझे तो मुस्कुराकर चल मुसाफिर॥

जानता जब तू कि कुछ भी हो तुझे ब़ढ़ना पड़ेगा,
आँधियों से ही न खुद से भी तुझे लड़ना पड़ेगा,
सामने जब तक पड़ा कर्र्तव्य-पथ तब तक मनुज ओ!
मौत भी आए अगर तो मौत से भिड़ना पड़ेगा,

है अधिक अच्छा यही फिर ग्रंथ पर चल मुस्कुराता,
मुस्कुराती जाए जिससे जिन्दगी असफल मुसाफिर!
पंथ पर चलना तुझे तो मुस्कुराकर चल मुसाफिर।

याद रख जो आँधियों के सामने भी मुस्कुराते,
वे समय के पंथ पर पदचिह्न अपने छोड़ जाते,

चिन्ह वे जिनको न धो सकते प्रलय-तूफान घन भी,
मूक रह कर जो सदा भूले हुओं को पथ बताते,
किन्तु जो कुछ मुश्किलें ही देख पीछे लौट पड़ते,
जिन्दगी उनकी उन्हें भी भार ही केवल मुसाफिर!
पंथ पर चलना तुझे तो मुस्कुराकर चल मुसाफिर॥

कंटकित यह पंथ भी हो जायगा आसान क्षण में,
पाँव की पीड़ा क्षणिक यदि तू करे अनुभव न मन में,
सृष्टि सुख-दुख क्या हृदय की भावना के रूप हैं दो,
भावना की ही प्रतिध्वनि गूँजती भू, दिशि, गगन में,
एक ऊपर भावना से भी मगर है शक्ति कोई,
भावना भी सामने जिसके विवश व्याकुल मुसाफिर!
पंथ पर चलना तुझे तो मुस्कुराकर चल मुसाफिर॥

देख सर पर ही गरजते हैं प्रलय के काल-बादल,
व्याल बन फुफारता है सृष्टि का हरिताभ अंचल,
कंटकों ने छेदकर है कर दिया जर्जर सकल तन,
किन्तु फिर भी डाल पर मुसका रहा वह फूल प्रतिफल,
एक तू है देखकर कुछ शूल ही पथ पर अभी से,
है लुटा बैठा हृदय का धैर्य, साहस बल मुसाफिर!
पंथ पर चलना तुझे तो मुस्कुराकर चल मुसाफिर॥

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  1. नीरज जी की इस अद्भुत सुन्दर रचना को पढवाने के लिये आभार

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  2. राहुल शर्मासितंबर 07, 2011 10:10 am

    मैं इस कविता को बहुत दिनों से ढूंढ रहा था. इसे मैंने बहुत साल पहले कॉलेज मैं पढ़ा था. बहुत बहत धन्यवाद.

    उत्तर देंहटाएं
  3. मैं नीरज की आज तक प्रकाशित सारी रचना पढ़ना चाहता हूँ.
    हिन्दी साहित्यकार सन्दर्भ कोश[3] के अनुसार नीरज की कालक्रमानुसार प्रकाशित कृतियाँ इस प्रकार हैं:
    संघर्ष (1944)
    अन्तर्ध्वनि (1946)
    विभावरी (1948)
    प्राणगीत (1951)
    दर्द दिया है (1956)
    बादर बरस गयो (1957)
    मुक्तकी (1958)
    दो गीत (1958)
    नीरज की पाती (1958)
    गीत भी अगीत भी (1959)
    आसावरी (1963)
    नदी किनारे (1963)
    लहर पुकारे (1963)
    कारवाँ गुजर गया (1964)
    फिर दीप जलेगा (1970)
    तुम्हारे लिये (1972)
    नीरज की गीतिकाएँ (19) साभार विकिपीडिया
    ये सारी रचनाएं मुझे कहाँ से प्राप्त हो सकती है? कृपया मार्गदर्शन करें.

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  4. प्रेरणा॒स्प्रद कविता.

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