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अब कहाँ रस्म घर लुटाने की
बर्कतें थी शराबख़ाने की

कौन है जिससे गुफ़्तुगु कीजे

जान देने की दिल लगाने की

बात छेड़ी तो उठ गई महफ़िल
उनसे जो बात थी बताने की

साज़ उठाया तो थम गया ग़म-ए-दिल

रह गई आरज़ू सुनाने की

चाँद फिर आज भी नहीं निकला

कितनी हसरत थी उनके आने की


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  1. चाँद फिर आज भी नहीं निकला
    कितनी हसरत थी उनके आने की.nice

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  2. बात छेड़ी तो उठ गई महफ़िल
    उनसे जो बात थी बताने की ।
    बहुत खूब ।

    उत्तर देंहटाएं
  3. कौन है अपना कौन पराया ,छोडो भी इन बातों को ,
    एक हम तुम हैं खैर से अपनी पर्दादारी क्यूँ बाकी है ?

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  4. चाँद फिर आज भी नहीं निकला
    कितनी हसरत थी उनके आने की
    Aise shayaron kee shayaree pe kya kahen?

    उत्तर देंहटाएं

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