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मृत्यु पर पाने विजय

सिद्धार्थ - साधक

एक और चला !


जिसने हर चरण

यम-वाहिनी की

छल-कुचालों को दला !


किसी भी व्यूह में न फँसा,

मौत पर

अपना कठिन फंदा कसा !


गा रहा है जो

ज़िन्दगी के गीत

मृत्यु-कगार पर,

एक दिन —

पा जायगा

पद अमर

अपना बदल कर रूप !

रखना सुरक्षित

इस धरोहर को

बना कर स्तूप !


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