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थरथरी सी है आसमानों में
जोर कुछ तो है नातवानों में

कितना खामोश है जहां लेकिन
इक सदा आ रही है कानों में

कोई सोचे तो फ़र्क कितना है
हुस्न और इश्क के फ़सानों में

मौत के भी उडे हैं अक्सर होश
ज़िन्दगी के शराबखानों में

जिन की तामीर इश्क करता है
कौन रहता है उन मकानों में

इन्ही तिनकों में देख ऐ बुलबुल
बिजलियां भी हैं आशियानों में

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  1. वाह बहुत सुन्दर प्रस्तुति धन्यवाद्

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  2. इन्ही तिनकों में देख ऐ बुलबुल
    बिजलियां भी हैं आशियानों में
    firak saheb jaisa kavi sallon mein hazaro salon mein ek hota hai ...wah ...bijaliyan bhi hai aashyano mein ....bahut hi gahre bhav ...

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  3. ho n gar hosh hi parindon ko
    josh rahta kahan udaanon mein

    ghazals ka bhandaar yahan paaya hai..Dhanywaad

    उत्तर देंहटाएं

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