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दुनिया इतनी आगे बढ़ जायेगी ,
कभी सोचा न था
सब ऐसे साथ छोड़ जायेंगे
कभी सोचा न था।

जब भी इसे देखा तो
सबको आगे बढ़ते देखा
सब ऐसे आगे बढ़ जायेंगे और
मै पीछे रह जाउंगी
कभी सोचा न था।

जब भी इसे देखा तो
सबको लड़ते देखा
सबमे प्रेम चैन खो जाएगा
कभी सोचा न था।

जब भी इसे देखा तो
पैसों को भावनाओं पर हावी होते देखा
पैसे इस कदर जरुरत बन जायेंगे
कभी सोचा न था।


यह कविता रचना दुबे द्वारा लिखी गयी है , जो कि कलकत्ता विश्वविद्यालय में हिंदी (प्रतिष्ठा) में अध्ययनरत है

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  1. सच कहा .... ये दुनिया बहुत आगे निकल गयी है ......... सब समय से भी तेज़ तेज़ चल रहे हैं ...... भाग रहे हैं अंधी डोड में .......... भावना रहित ........

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  2. बहुत सुन्दर कविता . रचना जी को बधाई ....

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  3. बहुत भावपूर्ण कविता है...धन्यवाद आपका इसे हम तक पहुँचाने के लिए...
    नीरज

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  4. रचना दुबे-विरचित कविता 'कभी सोचा न था' अन्तर्वस्तु और अभिव्यक्‍ति-सैन्दर्य की दृष्टि से अभिनव एवं आकर्षक है। प्रांजल भाषा-शैली में उन्होंने दुनिया का यथार्थ ही अंकित नहीं किया है; उसके प्रभाव को भी गहरे रंगों में रेखांकित किया है। वे यशस्विनी हों। उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना करता हूँ।
    *महेंद्रभटनागर [ग्वालियर]

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  5. रचनाजी की कविता 'कभी सोचा न था' सरल, सहज अभिव्यक्‍ति है। एक अच्छी रचना के लिए बधाई!
    -सुधीर सक्सेना 'सुधि

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  6. wow.........rachana i m so proud of u...yunhi bane raho......love u

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  7. आपकी इस पोस्ट को आज की बुलेटिन माखन लाल चतुर्वेदी और ब्लॉग बुलेटिन में शामिल किया गया है। कृपया एक बार आकर हमारा मान ज़रूर बढ़ाएं,,, सादर .... आभार।।

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