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दिल-ए नादां तुझे हुआ क्‌या है
अख़िर इस दर्‌द की दवा क्‌या है

हम हैं मुश्‌ताक़ और वह बेज़ार
या इलाही यह माज्‌रा क्‌या है

मैं भी मुंह में ज़बान रख्‌ता हूं
काश पूछो कि मुद्‌द`आ क्‌या है

जब कि तुझ बिन नहीं कोई मौजूद
फिर यह हन्‌गामह अय ख़ुदा क्‌या है

यह परी-चह्‌रह लोग कैसे हैं
ग़म्‌ज़ह-ओ-`इश्‌वह-ओ-अदा क्‌या है

शिकन-ए ज़ुल्‌फ़-ए अन्‌बरीं क्‌यूं है
निगह-ए चश्‌म-ए सुर्‌मह-सा क्‌या है

सब्‌ज़ह-ओ-गुल कहां से आए हैं
अब्‌र क्‌या चीज़ है हवा क्‌या है

हम को उन से वफ़ा की है उम्‌मीद
जो नहीं जान्‌ते वफ़ा क्‌या है

हां भला कर तिरा भला होगा
और दर्‌वेश की सदा क्‌या है

जान तुम पर निसार कर्‌ता हूं
मैं नहीं जान्‌ता दु`आ क्‌या है

मैं ने माना कि कुछ नहीं ग़ालिब
मुफ़्‌त हाथ आए तो बुरा क्‌या है

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  1. मुझे आपका ये प्रयास बहुत अच्छा लगा इन शायरों को पढने से बहुत खुछ सीखने को मिलता है। धन्यवाद। क्या हिन्दी लिप्पी मे उर्दू शब्द कोश कहीं उपलब्ध है? अगर हो तो जरूर बतायें धन्यवाद्

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  2. Pahlee baar is rachnake alfaaz theek se samajh ke padhe..shukriya!

    उत्तर देंहटाएं

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