4
Advertisement

आधुनिक हिन्दी साहित्य में प्रयोगवादी आन्दोलन के जनक के रूप में सच्चिदानंद हीरानंद वात्स्यायन " अज्ञे ' जाने जाते है । अज्ञेयजी ने आधुनिक हिन्दी कविता के प्रयोगवाद नामक आन्दोलन को सन १९४३ में तार -सप्तक नामक कविता संग्रह के प्रकाशन द्वारा जन्म दिया । इसकी भूमिका मे अज्ञेयजी द्वारा लिखित विचार हिन्दी आलोचना का एक प्रमुख स्तम्भ माना जाता है ।

यहां पर अज्ञेय जी कुछ कविताओं को विडियो के रूप में दिया जा रहा है । आशा है कि इसके माध्यम से उनके साहित्य के सौन्दर्य एवं शिल्प दृष्टि को समझने में सहायता मिलेगी -




एक टिप्पणी भेजें

  1. वाह आशुतोश जी लाजवाब प्रस्तुति है । धन्यवाद्

    उत्तर देंहटाएं
  2. बहुत बहुत अभिनन्दन इस अनुपम प्रस्तुति के लिए.......

    धन्यवाद

    उत्तर देंहटाएं
  3. लाजवाब प्रस्तुति है ...... ख़ज़ाना है आपके ब्लॉग पर ......

    उत्तर देंहटाएं

आपकी मूल्यवान टिप्पणियाँ हमें उत्साह और सबल प्रदान करती हैं, आपके विचारों और मार्गदर्शन का सदैव स्वागत है !
टिप्पणी के सामान्य नियम -
१. अपनी टिप्पणी में सभ्य भाषा का प्रयोग करें .
२. किसी की भावनाओं को आहत करने वाली टिप्पणी न करें .
३. अपनी वास्तविक राय प्रकट करें .

 
Top