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चुका भी हूँ मैं नहीं  -  शमशेर बहादुर सिंह
चुका भी हूँ मैं नहीं - शमशेर बहादुर सिंह

चुका भी हूँ मैं नहीं कहाँ किया मैनें प्रेम अभी । जब करूँगा प्रेम पिघल उठेंगे युगों के भूधर उफन उठेंगे सात सागर । किंतु मैं हूँ मौन आज कहाँ ...

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गोदान (४) - प्रेमचंद
गोदान (४) - प्रेमचंद

4 होरी को रात भर नींद नहीं आयी। नीम के पेड़-तले अपनी बाँस की खाट पर पड़ा बार-बा...

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मोचीराम - सुदामा पाण्डेय "धूमिल"
मोचीराम - सुदामा पाण्डेय "धूमिल"

राँपी से उठी हुई आँखों ने मुझे क्षण-भर टटोला और फिर जैसे पतियाये हुये स्वर में वह हँसते हुये बोला- बाबूजी सच कहूँ-मेरी निगाह में न कोई छोटा...

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शरारती बंदर - पंचतंत्र की  कहानियां
शरारती बंदर - पंचतंत्र की कहानियां

एक समय शहर से कुछ ही दूरी पर एक मंदिर का निर्माण किया जा रहा था। मंदिर में लकडी का काम बहुत थ इसलिए लकडी चीरने वाले बहुत से मजदूर काम पर लग...

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वापसी - उषा प्रियंवदा
वापसी - उषा प्रियंवदा

गजाधर बाबू ने कमरे में जमा सामान पर एक नज़र दौड़ाई -- दो बक्से , डोलची , बालटी -- '' यह डिब्बा कै...

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