डाउनलोड करें : चाँद का मुँह टेढा है

गजानन माधव मुक्तिबोध ,नई कविता के प्रमुख हस्ताक्षर है। 'चाँद का मुँह टेढा है' में मुक्तिबोध की अधिकाँश कविताओं का संकलन है ,अतः ये मुक्तिबोध के काव्यबोध को समझने के लिए आवश्यक है। इन कविताओं में विषय वैविध्य है। कवि के लिए कवि कर्म श्रम साध्य एवं विचार के क्षमताओं का बल प्रयोग है। स्वभावत: इनकी कविताओं में बुद्धिजन्य प्रतीक पर्याप्त मात्रा में है। इनकी कविताओं से स्पष्ट है कि वे सच्चे अर्थों में एक अनुभूतिशील कवि है। मुक्तिबोध की कविता अभिव्यक्ति और दृष्टि के लिए संघर्ष करती है। कविता का वैचारिक परिप्रेक्ष्य हो या शिल्प कहीं भी कवि के लिए रास्ता बना बनाया नही है। गहन अनुभव एवं वैचारिक संघर्ष के बाद वे कविता को प्राप्त करते है। इसीलिए उनकी कविता परम्परागत काव्यात्मक ढाँचा तोड़कर नया सौंदर्यशास्त्र का निर्माण करती है।

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मुझे आपके सुझावों की प्रतीक्षा है।

1 टिप्पणियाँ:

Amit K Sagar ने कहा…

आपके प्रयास का खंडन मुश्किल है. शुभकामनाएं. जारी रहें.
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अंतिम पढ़ाव पर- हिंदी ब्लोग्स में पहली बार Friends With Benefits - रिश्तों की एक नई तान (FWB) [बहस] [उल्टा तीर]

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