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प्रेमचंद का सेवासदन

प्रेमचंद को हिन्दी साहित्य में उपन्यास सम्राट की उपाधि प्राप्त है। 'सेवासदन' ,प्रेमचंद का प्रमुख उपन्यास है,इसका प्रकाशन सन १९१८ में हुआ था। प्रेमचंद को हिन्दी में प्रतिष्ठित करने वाला पहला उपन्यास सेवासदन पहले उर्दू में 'बजारे हुस्न' शीर्षक से लिखा गया था,पर उसका उर्दू रूप हिन्दी रूपांतरण के बाद प्रकाशित हुआ। इसी आधार पर सेवासदन को प्रेमचंद का पहला उपन्यास माना जाता है।


अपने प्रथम उपन्यास सेवासदन में प्रेमचंद ने वैश्या जीवन से सम्बद्ध समस्याओं के चित्रण का प्रयास किया। सेवासदन में स्त्रियों के वैश्यावृति अपनाने के मूल में तिलक -दहेज़ की प्रथा ,पति द्वारा पत्नी की उपेक्षा ,उसके प्रति अविश्वास और क्रूर व्यवहार तथा समाज की उपेक्षा और असहानुभूती को कारण माना गया है। सेवासदन में प्रेमचंद ने समकालीन मध्यवर्ग की आर्थिक हालत ,मूल्य संकट ,नैतिक दुर्बलता , वैचारिक ढुलमूलपन आदि का विस्तारपूर्वक एवं विश्वसनीय चित्रण किया है।

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