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जयशंकर प्रसाद की कामायनी डाउनलोड करें
जयशंकर प्रसाद जी, हिन्दी काव्य-जगत के प्रमुख स्तम्भ है। प्रसाद जी द्वारा रचित 'कामायनी' आधुनिक हिन्दी साहित्य का सर्वश्रेष्ठ महाकाव्य है।इसका प्रकाशन सन १९३६ में हुआ। इसे हिन्दी साहित्य में तुलसीदास द्वारा रचित 'रामचरितमानस' के बाद हिन्दी का दूसरा अनुपम महाकाव्य माना जाता है। प्रसाद जी कला का सर्वोच्च शिखर कामायनी है। छायावादी युग का यह सर्वश्रेष्ठ महाकाव्य है। इसे छायावाद का उपनिषद कहा जाता है।कामायनी में मनु और श्रद्धा के माध्यम से मानव जीवन की सम्पूर्ण कहानी मनोवैज्ञानिक ढंग से कही गई है। इस महाकाव्य में १५ सर्ग है। इस काव्य के नायक मनु और श्रद्धा है। इसकी सारी घटनाएं प्रतीकात्मक है। कामायनी रूपक या मनोवैज्ञानिक काव्य मानी जाती है। इसके सम्बन्ध में डॉ.शिव कुमार शर्मा का कथन है कि 'व्यक्तिवादी काव्य की चरम परिणति कदाचित प्रसाद जी की कामायनी में हुई है। मनु महाराज के मानसिक विकास और बाह्रा - संघर्ष के रूप में आज के व्यक्ति के विकासोन्मुख व्यक्तित्व की ही अंतर्कथा है। जिस आनंद की ओर प्रसाद जी ने 'लहर' में संकेत किया था ,उसी आनंद के कैलाश शिखर पर अंततः मनुमहाराज प्रतिष्ठित होते है। इस प्रकार आधुनिक युग का यह एकमात्र प्रतिनिधि महाकाव्य व्यक्तिवाद के विकास और पूर्ण परिणति युक्त प्रकाश की कहानी है।'
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मुझे आपके सुझावों की प्रतीक्षा है।
सौजन्य : scribd
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Nirmla Kapila
22 सितम्बर 2009 8:52 am
इस सौगात के लिये बहुत बहुत धन्यवाद्
Smart Indian - स्मार्ट इंडियन
23 सितम्बर 2009 1:45 am
धन्यवाद!
Petamber Pant
19 फरवरी 2010 11:15 am
Thanks a lot for such a beautiful gift. Sorry i could not type in hindi font.
shiv prakash
19 जनवरी 2011 12:00 pm
presentation is honour of indian. keeping up is our duty
yashwant
26 अगस्त 2011 10:46 pm
सचमुच ही ज्ञान वर्धक सग्रहण है |
rajeshhhh
15 सितम्बर 2011 4:14 pm
राजेश
आपके इस सहयोग का मैं हार्दिक अभिनन्दन करता हूँ..जय शंकर प्रसाद भारत के गौरव हैं .....
rajeshhhh
15 सितम्बर 2011 4:15 pm
आपके इस सहयोग का मैं हार्दिक अभिनन्दन करता हूँ..जय शंकर प्रसाद भारत के गौरव हैं .....