प्रेमचंद का गोदान डाउनलोड करें
प्रेमचंद ,हिन्दी साहित्य के ऐसे कथाकार का नाम है,जिनसे सामान्य से सामान्य व्यक्ति भी परिचित है। उन्हें उपन्यास सम्राट की उपाधि प्राप्त है। 'गोदान' उनकी कालजयी कृति है। यह उपन्यास १९३६ में प्रकाशित हुआ था और यह प्रेमचन्द का अन्तिम उपन्यास है। संसार की शायद ही कोई भाषा होगी,जिसमे गोदान का अनुवाद न हुआ हो ।प्रेमचंद का गोदान, किसान जीवन के संघर्ष एवं वेदना को अभिव्यक्त करने वाली सबसे महत्वपूर्ण रचना है। यह प्रेमचंद की आकस्मिक रचना नही है ,वरन उनके जीवन भर के लेखन प्रयासों का निष्कर्ष है। यह रचना और भी तब महत्वपूर्ण बन जाती है ,जब प्रेमचंद भारत के ऐसे कालखंड का वर्णन करते है ,जिसमे सामंती समाज के अंग किसान और जमींदार दोनों ही मिट रहे है और पूंजीवादी समाज के मजदूर तथा उद्योगपति उनकी जगह ले रहे है । गोदान ,ग्रामीण जीवन और कृषक संस्कृति का महाकाव्य कहा जा सकता है । ग्रामीण जीवन का इतना वास्तविक ,व्यापक और प्रभावशाली चित्रण ,हिन्दी साहित्य के किसी अन्य उपन्यास में नही हुआ है। संभवत: गोदान विश्व साहित्य में बेजोड़ है।
आप इस उपन्यास को यहां से डाउनलोड करें, खुद पढे़ एवं अपने मित्रो को भी पढ़ने के लिये वितरित करें.
मुझे आपके सुझावों की प्रतीक्षा है.
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एकलव्य
12 सितम्बर 2009 6:00 pm
प्रेमचंद जी के बारे में सरगार्वित जानकारी देने के लिए शुक्रिया
Apoorv
12 सितम्बर 2009 8:44 pm
लिंक के लिये धन्यवाद..
Mithilesh dubey
12 सितम्बर 2009 9:01 pm
बहुत-बहुत आभार आपका।
Nirmla Kapila
13 सितम्बर 2009 12:50 pm
सार्गर्भित जानकारी के लिये धन्यवाद मेरे पास गोदान है आभार्
बेनामी
3 नवम्बर 2010 12:49 pm
shukriya
हिंदी मंत्रणसभा,कोट्टारक्करा
14 जनवरी 2011 5:13 am
जी,केरल के नवीं कक्षा की पाट्यपुस्तिका में गेदान से कुछ अंश है।हमारे लिए यह संदेश बहुत उपयोगी है।आपका आभार है।हमारे ब्लोग में हम इसका लिंक देना चाहते हैं।
mukta khanna
31 जुलाई 2011 11:47 am
premchand hindi upanyas smarat kahe jate hai aur 'godan'unka mahan upanyas jisme aadersh aur yatharth ka anupam sanyojan.'godan'sirf hori ki kahani nahi hai ye pure karshk verg ki darun gatha hai jisme dukh tekleef aur andkarmey jeevan ka sajeev dershan prapt hota hai