23
Advertisement

हरिशंकर परसाई : एक परिचय

आधुनिक हिन्दी साहित्य के प्रसिद्ध व्यंग लेखक श्री हरिशंकर परसाई का जन्म २२ अगस्त सन १९२२ को मध्यप्रदेश के होशंगाबाद जिले में जामानी नामक गाँव में हुआ था। इनकी प्रारम्भिक शिक्षा गाँव में ही हुई। उसके बाद इन्होने नागपुर विश्वविद्यालय से एम.ए.किया। कुछ बर्षो तक अध्यापन का कार्य करने के बाद इन्होने नौकरी से त्यागपत्र दे दिया और १९५७ से स्वतंत्र लेखन आरम्भ कर दिया। परसाई जी मुख्य रूप से व्यंग लेखक है। हिन्दी में व्यंग लेखन कम हुआ है पर परसाई जी ने इस अभाव की पूर्ति की है और उनका यह कार्य अनुपम और अनूठा है। १० अगस्त सन १९९५ को जबलपुर में इनका देहांत हो गया।

परसाई मुख्यतः व्यंग -लेखक है,पर उनका व्यंग केवल मनोरजन के लिए नही है। उन्होंने अपने व्यंग के द्वारा बार-बार पाठको का ध्यान व्यक्ति और समाज की उन कमजोरियों और विसंगतियो की ओर आकृष्ट किया है जो हमारे जीवन को दूभर बना रही है। उन्होंने सामाजिक और राजनीतिक जीवन में व्याप्त भ्रष्टाचार एवं शोषण पर करारा व्यंग किया है जो हिन्दी व्यंग -साहित्य में अनूठा है। परसाई जी अपने लेखन को एक सामाजिक कर्म के रूप में परिभाषित करते है। उनकी मान्यता है कि सामाजिक अनुभव के बिना सच्चा और वास्तविक साहित्य लिखा ही नही जा सकता । साहित्यकार और सामाजिक अनुभव के संबंधो के बारे में वे लिखते है :-"साहित्यकार का समाज से दोहरा सम्बन्ध हैवह समाज से अनुभव लेता है,अनुभवों में भागीदार होता हैबिना सामाजिक अनुभव के कोई सच्चा साहित्य नही लिखा जा सकता ,लफ्फाजी की जा सकती हैसाहित्यकार सामाजिक अन्वेषण भी करता हैउन छिपे अंधेरे कोनों का अन्वेषण करता है जो सामान्य चेतना के दायरे में नही आतेवह इन सामाजिक अनुभवों का विश्लेषण करता है ,कारण और अर्थ खोजता है,उन्हें संवेदना के स्तर तक ले जाता है और उन्हें ,रचनात्मक चेतना का अंग बना कर रचना करता हैफिर समाज से पाई इस वास्तु को रचनात्मक रूप देकर फिर समाज को लौटा देता हैइस तरह साहित्य एक सामाजिक कर्म हो जाता है ।"

परसाई जी मूलतः एक व्यंगकार है । सामाजिक विसंगतियो के प्रति गहरा सरोकार रखने वाला ही लेखक सच्चा व्यंगकार हो सकता है। परसाई जी सामायिक समय का रचनात्मक उपयोग करते है। उनका समूचा साहित्य वर्तमान से मुठभेड़ करता हुआ दिखाई देता है। परसाई जी हिन्दी साहित्य में व्यंग विधा को एक नई पहचान दी और उसे एक अलग रूप प्रदान किया ,इसके लिए हिन्दी साहित्य उनका हमेशा ऋणी रहेगा ।

रचना - कर्म :
कहानी संग्रह : जैसे उनके दिन फिरे।
उपन्यास : रानी नागफनी की कहानी ,तट की खोज ।
निबंध संग्रह : तब की बात और थी,भूत के पाँव पीछे ,बेईमानी की परत ,पगडंडियो का जमाना ,सदाचार की ताबीज ,शिकायत मुझे भी है ,और अंत में ।
व्यंग -निबंध संग्रह : तिरछी रेखायें ,ठिठुरता हुआ गणतंत्र ,विकलांग श्रद्धा का दौर ,वैष्णव की फिसलन ।

एक टिप्पणी भेजें

  1. आशुतोष जी , नमस्कार
    देरी से जबाब देने लिए खेद है ! कई दिनों से इन्टरनेट से दूर था इसलिए आपके सवाल का जबाब समय पर नहीं दे पाया | अपने ब्लॉग को कस्टम डोमेन पर ले जाने के लिए सिर्फ १० डॉलर का खर्च आता है और यह कैसे किया जाय इसके लिए आप हिंदी ब्लॉग टिप्स की यह पोस्ट पढ़े
    http://tips-hindi.blogspot.com/2008/11/video-tutorial_6608.html

    उत्तर देंहटाएं
  2. ऐसे गुणी जनों के बारे में जानकार अच्छा लगता है
    शुक्रिया जानकारी के लिए
    आपको और आपके परिवार को होली मुबारक

    उत्तर देंहटाएं
  3. bahut ahchcee jankari mili.
    kuchh dino pahle taau ji ke blog ke thru in ke baare mein padha tha.
    abhaar sahit

    उत्तर देंहटाएं
  4. महिला दिवस पर युवा ब्लॉग पर प्रकाशित आलेख पढें और अपनी राय दें- "२१वी सदी में स्त्री समाज के बदलते सरोकार" ! महिला दिवस की शुभकामनाओं सहित...... !!

    उत्तर देंहटाएं
  5. बहुत अच्छा काम कर रहे हो भाई। लेख को थोड़ा और विस्तार दो तो और भी अच्छा हो!

    उत्तर देंहटाएं
  6. dhanyawad mere guru ko yaad karne ke liye .... please visit my blog www.rangparsai.blogspot.com

    उत्तर देंहटाएं
  7. आज ही आपके ब्लाग पर आया हूं। सुंदर ही नहीं, साहित्य-प्रेमियों के लिए तो अमृत समान है। इतने महान साहित्यकारों के विषय में जानकर हृदय अभिभूत हो गया।
    धन्यवाद और बधाई भी।
    महावीर शी्मा

    उत्तर देंहटाएं
  8. होली की हार्दिक शुभकामनाये आप इसी तरह से होसला बढाते रहेगे इसी आशा और विश्वाश के साथ

    उत्तर देंहटाएं
  9. परसाई और शरद जोशी व्यंग्य लेखन के लिए सदैव याद किये जाते रहेंगे.

    उत्तर देंहटाएं
  10. दुबे जी
    हरिशंकर परसाई जी ने व्यंग्य को हिंदी साहित्य में एक विधा का स्वरूप प्रदान िकिया। मैं उनके जनम ग्राम जमानीके पास इटारसी म.प्र. में ही रहता हूं। परसाई जी से मिलने का सौभाग्य भी प्राप्त हुआ है। जबलपुर से इटारसी आने पर वे हमारे घर पर भी आया करते थे। ऐसे प्रगतिशील विचारधार युक्त लेखक पर उनके जीवन परिचय के अलावा उनके साहित्य पर भी कुछ लिखिये।
    अखिलेश शुक्ल
    please visit us--
    http://katha-chakra.blogspot.com

    उत्तर देंहटाएं
  11. माननीय महोदय,
    आज आपके ब्लाग पर आने का अवसर मिला। बहुत ही उपयोगी रचना है आपकी। यदि आप इन्हें प्रकाशित कराना चाहते हैं तो मेरे ब्लग पर अवश्य ही पधारे। आप निराश नहीं होंगे।
    समीक्षा के लिए http://katha-chakra.blogspot.com
    आपके संग्रह/पुस्तक प्रकाशन के लिए http://sucheta-prakashan.blogspot.com
    अखिलेश शुक्ल

    उत्तर देंहटाएं
  12. वाह भई वाह...सुन्दर अति सुन्दर...ये पहला ऐसा ब्लाग है जो हिन्दी पर सच में समर्पित है..इतने अच्छे ब्लाग के लिये कोटिशः धन्यवाद.........

    उत्तर देंहटाएं
  13. परसाई जी पर लिखा आलेख बहुत अच्छा लगा . अगस्त में ही उनक जन्म दिन है इसलिए हम भी आपके आभारी हैं.
    मैं उनके गृह नगर जबलपुर का ही मूल निवासी हूँ , इस लिए मैं व्यंग्य पुरोधा श्री परसाई जी के महत्त्व को समझता हूँ, और उनसे सम्बंधित प्रकाशन मेरे लिए कहीं भी हो बड़े गर्व की बात होती है.
    - विजय

    उत्तर देंहटाएं
  14. परसाई जी के बारे मे जानकर बहुत अच्छा लगा धन्यवाद्

    उत्तर देंहटाएं
  15. परसाई जी के बारे में तथ्यात्मक जानकारी परोसने के लिए आप साधुवाद के पात्र हैं.

    उत्तर देंहटाएं
  16. a very helpful blog..thanks a lot

    उत्तर देंहटाएं
  17. जानकारी के लिए धन्यवाद


    राजेश सिंह
    नवी मुंबई

    उत्तर देंहटाएं
  18. khoj thi ki hindi kahaniya mile............yaha to ak sath....bahut
    ...mila he...dhanyawad........

    उत्तर देंहटाएं
  19. Aaj sare din ki daud bhag ke baad, net par kuchh search kar raha tha thabhi mughe HINDI KUNJ aise prapt ho gai jaise tapte unhale me bhatkate hua rahgir ko sheetal jal mil jaaye. Bahut varsho se jindagi ki aapa dhapi me hindi sahitya se sampark vichhed sa ho gaya tha. Ummid hai Hindi Kunj ke madhyam se mai punah ek baar hindi sahitya ki rasdhara me bhig kar aatmik aanand prapt kar sakunga. Dhanyavvad Hindi Kunj:

    Manu Manoj

    उत्तर देंहटाएं
  20. mast h baba............ 1 dam rapchick.... bole to taktk

    उत्तर देंहटाएं

आपकी मूल्यवान टिप्पणियाँ हमें उत्साह और सबल प्रदान करती हैं, आपके विचारों और मार्गदर्शन का सदैव स्वागत है !
टिप्पणी के सामान्य नियम -
१. अपनी टिप्पणी में सभ्य भाषा का प्रयोग करें .
२. किसी की भावनाओं को आहत करने वाली टिप्पणी न करें .
३. अपनी वास्तविक राय प्रकट करें .

 
Top