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रामचंद्र शुक्ल


आचार्य रामचंद्र शुक्ल : एक परिचय

आचार्य रामचंद्र शुक्ल ,आधुनिक हिन्दी साहित्य के एक उच्चकोटि के निबंधकार और आलोचक के रूप में जाने जाते हैआचार्य रामचंद्र शुक्ल जी का जन्म उत्तर प्रदेश के बस्ती जिले के अगोना नामक ग्राम के हुआ थाउनकी प्रारंभिक शिक्षा उर्दू -अंग्रेजी में हुईउनकी शिक्षा मात्र इंटरमीडीएट तक हुईकुछ समय तक उन्होंने मिर्जापुर के मिशन स्कूल में अध्यापन का कार्य कियामिर्जापुर के बद्रीनारायण चौधरी "प्रेमधन" के संपर्क में शुक्ल जी का हिन्दी की ओर विशेष झुकाव हुआइसके बाद १९०९ -१० में जब नागरी प्रचारणी सभा(बनारस) की ओर से हिन्दी शब्दकोष बनाने का कार्य आरम्भ हुआ तब उन्हें सहायक संपादक का कार्य मिलाइसके बाद वे काशी हिंदू विश्वविद्यालय में हिन्दी अध्यापक के पद पर आसीन हुए और श्यामसुंदर दास जी अवकाश ग्रहण करने पर हिन्दी -विभाग के अध्यक्ष बनेइसी पद पर कार्य करते हुए उनका निधन हो गया
आचार्य शुक्ल जी स्वाध्याय द्वारा संस्कृत ,अंग्रेजी ,बंगला और हिन्दी के प्राचीन साहित्य का गंभीर अध्ययन कियाहिन्दी साहित्य में उनका प्रवेश कवि और निबंधकार के रूप में हुआ और उन्होंने बंगला तथा अंग्रेजी साहित्य का हिन्दी में सफल अनुवाद कियाआगे चल कर आलोचना उनका मुख्य विषय बन गयाएक चिंतनशील स्वाध्यायी साहित्यकार के नाते उनकी लेखनी से साहित्य का कोई अंग अछुता नही रहाउन्होंने निबंध ,इतिहास,कहानी, समालोचना ,अनुवाद और काव्य आदि सभी को अपनी मौलिक प्रतिभा से छुकर नवीन स्वरुप प्रदान कियानिबंध "चिंतामणि" तीन भाग में प्रकाशित हुए है ,जो मनोवैज्ञानिक एवं समालोचनात्मक हैइनमे इनके व्यक्तित्व की स्पष्ट झाकी उपलब्ध होती है और अध्ययन की गरिमा तो सभी जगह है हीआलोचना की दृष्टि से जायसी ग्रंथावली की भूमिका और भ्रमरगीत सार की भूमिका महत्वपूर्ण ग्रन्थ है। "हिन्दी साहित्य का इतिहास" तो साहित्य की इतिहास की दृष्टि से ,सर्वप्रथम प्रयास हैइनके अतिरिक्त अंग्रेजी में आनंद,बुद्धचरित तथा आदर्श जीवन आदि प्रसिद्ध पुस्तके है। "काव्य में रहस्यवाद" निबंध पर आपको हिन्दुस्तानी अकादमी से ५०० रुपये का तथा चिंतामणि पर हिन्दी साहित्य सम्मलेन ,प्रयाग द्वारा १२०० रुपये का मंगला प्रशाद पारितोषिक प्राप्त हुआ था
हिन्दी में गद्य -शैली के सर्वश्रेष्ठ प्रस्थापकों में आचार्य रामचंद्र शुक्ल जी का नाम सर्वोपरि हैउन्होंने अपने दृष्टिकोण से भाव ,विभाव,रस आदि की पुनव्याख्या की, साथ ही साथ विभिन्न भावों की व्याख्या में उनका पांडित्य ,मौलिकता और सूक्ष्म पर्यवेक्षण पग -पग पर दिखाई देता हैहिन्दी की सैधांतिक आलोचना को परिचय और सामान्य विवेचन के धरातल से ऊपर उठाकर गंभीर स्वरुप प्रदान करने का श्रेय शुक्ल जी को ही हैउनकी शैली के सम्बन्ध में डॉ.गणपतिचन्द्र गुप्त लिखते है : निबंधकार शुक्ल जी शैली में भी निजी विशिष्टता मिलती हैभारतेंदु -युग की सी मौलिकता उसमे है किंतु वे उसके छिछलेपन से दूर है,द्विवेदी युग की विचारात्मकता उसमे है ,किंतु वैसी शुष्कता का अभाव हैविचारो की गंभीर घाटियो के बीच -बीच में उतरी हास्य -व्यंग से ओत -प्रोत उक्तिया किसी साफ़ -शीतल निर्झर के कोमल कल-कल स्वर की तरह सुनाई पड़ती है

रचना कर्म :
आलोचना साहित्य : तुलसीदास,जायसी ग्रंथावली की भूमिका ,सूरदास ,चिंतामणि (तीन भाग) ,हिन्दी साहित्य का इतिहास और रसमीमांसा

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14 टिप्पणियाँ

आचार्य रामचंद्र शुक्ल जी हिन्दी साहित्य जगत के प्रखर आलोचक और अच्छे कहानीकार थे . इसमे कोई संदेह नही है . मैंने उनके बारे में काफी कुछ पढ़ा और सुना है . आचार्य रामचंद्र शुक्ल जी के बारे में अच्छी पोस्ट के लिए बधाई

प्रिय मित्र
शुक्ल् जी पर आपने जो कुछ लिखा है वह केवल सतही ही है। उनपर आपको विशद अध्ययन करके लिखना चाहिए। यह एक ऐसा व्यक्तित्व हैै जिसकी जितनी व्याख्या की जाए उतने ही नए आयाम मिलतके है।
अखिलेश शुक्ल्
संपादक कथा चक्र
pl visit--
http;//katha-chakra.blogspot.com

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सर, मै अपने ब्लॉग पर अभी मात्र साहित्यकारों का सामान्य परिचय ही अभी दे रहा हूँ,साथ ही उन साहित्यकारों को भी इंगित कर रहा हूँ जिससे हिन्दी साहित्य की दिशा व धारा बदलती है। अतः मै उनके साहित्य ,विचारधारा ,शैली की कुछ समय बाद आलोचना व समीक्षा करूँगा । मै मानता हूँ कि आचार्य शुक्ल जी पर बहुत ही विषद समीक्षा करने की जरुरत है,जो मै कुछ समय बाद अपने ब्लॉग पर हिन्दी साहित्य का इतिहास, कड़ी में करूँगा। अतः इस सन्दर्भ में आपके स्नेह और सहयोग की मुझे जरुरत है, ताकि मै इस कार्य को और अधिक उपादेय बना सकूं।

AASHUTOSH JI, sabki vichardhara alag-alag hoti hai mera mamna hai ki aap satat prayas se hindi ko aage badhane ki koshish kar rahe hai wo kabiletareef hai,,,,

सुन्दर प्रयास...सक्रियता बनाये रखें !!

आचार्य रामचंद्र शुक्ल के सन्दर्भ में
बहुत कुछ प्राप्त किया है. आपने जिस तरह से
उनके जीवन का परिचय दिया वो अति उत्तम है.
मेरा मानना है की आज जरुरत
है उन साहित्यकारों के बारे में
जानने समझने की जो इतिहास में कद होने लगे है.
आपका प्रयास सराहनीय है.
धन्यवाद

...प्रभावशाली प्रस्तुतिकरण है, प्रसंशनीय है।

aapke maadhyam se hindi sahitya ke baare me bahut kuchh janne ko mil raha hai dhanyvaad

mene pratham bar ye web site open ki or isme ram chandra sukla par lekh achha de rakha he jo kisi bhi mayne me kam nahi anka ja sakta.

हिंदी कुंज

बहुत कुछ जान कारी मिलती है
थोडा थोडा याद आ रहा है
धन्यवाद

mujhe yah jankar badi khushi hui ki aapne hindi rachanakaro avam unaki rachanao ko jinda rakhne kae liye is site ko madhyam banaya. Vastav me kai aise kathakar huve hai ki kisi ko khoj kabar tak nahi hai. aise rachanakaro ke liye yah site ak vardan sabit hogo. is prashanshniy karya ke liye apka bahut bahut dhanyavad.

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